रायपुर/गरियाबंद (दुनिया दस्तक):
छत्तीसगढ़ की सियासत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा केंद्र ‘धान’ एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कैबिनेट ने एक ऐसा निर्णय लिया है जिसने प्रदेश के अन्नदाताओं के बीच त्यौहार जैसा माहौल पैदा कर दिया है। ‘कृषक उन्नति योजना’ के तहत धान की अंतर राशि (बोनस) का भुगतान अब किस्तों में नहीं, बल्कि होली से ठीक पहले एकमुश्त (Lump sum) किया जाएगा। यह खबर न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूती देगी, बल्कि प्रदेश के बाजारों में भी नई जान फूंक देगी।
खबर का विस्तार: क्या है साय सरकार का ‘होली मास्टरस्ट्रोक’?
छत्तीसगढ़ में पिछली सरकारों के दौरान किसानों को बोनस की राशि किस्तों में मिलती थी, जिससे उन्हें अपनी बड़ी योजनाओं या कर्ज चुकाने में समय लगता था। लेकिन duniyadastak.com की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, इस बार मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों को उनकी मेहनत का पूरा फल एक ही बार में दिया जाए।

सांकेतिक तस्वीर: छत्तीसगढ़ कैबिनेट की बैठक की फाइल फोटो
15 फरवरी 2026 को हुई कैबिनेट की बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि मार्च के दूसरे सप्ताह में, यानी होली के त्यौहार से ठीक 4-5 दिन पहले, बटन दबाकर सीधे किसानों के DBT (Direct Benefit Transfer) खातों में राशि भेजी जाएगी।
कैबिनेट के निर्णयों की अधिक जानकारी के लिए आप dprcg.gov.in पर जा सकते हैं।
3100 रुपये का वादा और ₹800 का गणित
भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में किसानों से ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने का वादा किया था। वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और ₹3100 के बीच जो अंतर की राशि (लगभग ₹800-₹900 प्रति क्विंटल) है, उसे ही बोनस या अंतर राशि कहा जा रहा है।
- कुल लक्ष्य: इस साल छत्तीसगढ़ सरकार ने रिकॉर्ड 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की है।
- लाभार्थी: गरियाबंद, राजिम, धमतरी और महासमुंद जैसे कृषि प्रधान बेल्ट सहित प्रदेश के लगभग 25.24 लाख पंजीकृत किसान।
- बजट का प्रावधान: इसके लिए वित्त विभाग ने करीब 10,000 करोड़ से अधिक की राशि का प्रावधान किया है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका असर: गरियाबंद और राजिम बेल्ट की खास रिपोर्ट
विशेषज्ञों का मानना है कि जब एक साथ इतनी बड़ी राशि ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचती है, तो इसका सीधा असर स्थानीय व्यापार पर पड़ता है। गरियाबंद और राजिम जैसे क्षेत्रों में, जहाँ अधिकांश आबादी खेती पर निर्भर है, वहां ट्रैक्टरों की बिक्री, खाद-बीज की एडवांस बुकिंग और त्यौहारों की खरीदारी में उछाल आने की उम्मीद है।
राजिम के एक स्थानीय किसान रामकिशुन साहू ने दुनिया दस्तक को बताया, “पिछली बार किस्तों के चक्कर में शादी-ब्याह के लिए साहूकारों से कर्ज लेना पड़ता था, लेकिन इस बार अगर एकमुश्त पैसा मिलता है, तो हम अपनी बेटियों की शादी और अगली फसल की तैयारी बिना किसी कर्ज के कर पाएंगे।”
विपक्ष की नज़र और सरकार की तैयारी
जहाँ एक ओर सरकार इसे अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल कांग्रेस इस प्रक्रिया में हो रही देरी और तकनीकी खामियों पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि डेटा मिलान (Verification) का काम 95% पूरा हो चुका है। खाद्य विभाग और सहकारी बैंकों को अलर्ट पर रखा गया है ताकि सर्वर की समस्या के कारण किसी किसान का भुगतान न रुके।
धान खरीदी के इस सीजन के कुछ चौंकाने वाले आंकड़े:
| विवरण | आंकड़े |
| कुल पंजीकृत किसान | 25.24 लाख |
| कुल धान खरीदी (अनुमानित) | 141.04 लाख मीट्रिक टन |
| भुगतान की विधि | सीधे बैंक खाता (DBT) |
| प्रति क्विंटल भाव | ₹3100 (MSP + अंतर राशि) |
| भुगतान का समय | मार्च 2026 (होली से पहले) |
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का भावनात्मक संदेश
कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, “यह सरकार किसानों की अपनी सरकार है। हम जानते हैं कि कड़ाके की ठंड और खेतों के कीचड़ में खड़े होकर अन्न उगाना कितना कठिन है। हम नहीं चाहते कि हमारे किसान भाई त्यौहारों के समय किसी के आगे हाथ फैलाएं। यह ₹10,000 करोड़ का भुगतान प्रदेश की खुशहाली की बुनियाद बनेगा।”
न्यूज़ ब्लॉग (duniyadastak.com) की राय
छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहाँ की 70% से अधिक आबादी कृषि पर टिकी है, इस तरह के फैसले गेम-चेंजर साबित होते हैं। यह न केवल राजनीतिक रूप से सरकार को मजबूती देता है, बल्कि सामाजिक स्तर पर किसानों के आत्मसम्मान को भी बढ़ाता है।
किसान भाइयों के लिए सुझाव: अपनी बैंक पासबुक अपडेट रखें और सुनिश्चित करें कि आपका आधार आपके बैंक खाते से लिंक है। यदि केवाईसी (KYC) पेंडिंग है, तो उसे तुरंत पूरा करें ताकि ऐन वक्त पर भुगतान में कोई रुकावट न आए।



