गरियाबंद में छात्र की मौत पर बवाल: आदिवासी समाज ने किया NH-130C जाम, अधीक्षक पर लापरवाही का आरोप, 1 करोड़ मुआवजे की मांग

गरियाबंद के मैनपुर में छात्र राघव की मौत के विरोध में नेशनल हाईवे 130C पर आदिवासी समाज का चक्काजाम और प्रदर्शन।
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मैनपुर/गरियाबंद (दुनिया दस्तक): गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र में आज गुरुवार की सुबह उस वक्त तनाव की स्थिति निर्मित हो गई, जब आदिवासी समाज और आक्रोशित ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे-130C पर चक्काजाम कर दिया। यह विरोध प्रदर्शन बड़ेगोबरा आदिवासी बालक आश्रम के कक्षा सातवीं के छात्र राघव कुमार की मौत के बाद उपजा है। ग्रामीणों का आरोप है कि आश्रम अधीक्षक की घोर लापरवाही के कारण एक मासूम बच्चे की जान चली गई। गुरुवार सुबह 8:00 बजे से जारी इस आंदोलन के कारण नेशनल हाईवे पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई हैं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया है।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम गजकन्हार (धमतरी जिला) निवासी छात्र राघव कुमार, मैनपुर से 8 किमी दूर ग्राम भाठीगढ़ में संचालित शासकीय आदिवासी बालक आश्रम बड़ेगोबरा में पढ़ाई कर रहा था। परिजनों का कहना है कि राघव अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। 20 जनवरी से ही उसकी तबीयत खराब होने लगी थी। आरोप है कि राघव लगातार आश्रम के कर्मचारियों और अधीक्षक राकेश साहू से अपनी बीमारी की शिकायत कर रहा था और अपने माता-पिता से फोन पर बात कराने की गुहार लगा रहा था।

पीड़ित परिवार का दावा है कि आश्रम प्रबंधन ने छात्र की तकलीफ को पूरी तरह अनसुना कर दिया। जब 26 जनवरी को छात्र के पिता फिरतु राम मंडावी को किसी तरह खबर मिली और वे आश्रम पहुँचे, तो बच्चे की हालत देख उनके होश उड़ गए। पिता तुरंत बच्चे को इलाज के लिए धमतरी ले गए, लेकिन तब तक संक्रमण शरीर में फैल चुका था और इलाज के दौरान मासूम राघव ने दम तोड़ दिया।

प्रशासनिक चुप्पी के बाद सड़क पर उतरा समाज

ग्रामीणों और आदिवासी समाज का गुस्सा इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इस मामले में पहले ही प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की गई थी। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि 09 फरवरी 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (SDM) मैनपुर को एक ज्ञापन सौंपकर 10 दिनों के भीतर कार्रवाई की मांग की गई थी। लेकिन 10 दिन बीत जाने के बाद भी जब आश्रम अधीक्षक पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आज 19 फरवरी को समाज के लोगों ने सड़क पर उतरने का फैसला लिया।

हाईवे पर यातायात की स्थिति और नेशनल हाईवे के रूट चार्ट की अधिक जानकारी के लिए [NHAI के आधिकारिक पोर्टल] पर अपडेट देख सकते हैं।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें:

  1. FIR और बर्खास्तगी: आश्रम अधीक्षक राकेश साहू के खिलाफ तत्काल आपराधिक मामला दर्ज किया जाए और उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जाए।
  2. मुआवजा: मृतक छात्र के परिवार को 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाए।
  3. सुरक्षा ऑडिट: आश्रमों में बच्चों की स्वास्थ्य सुविधाओं की उच्च स्तरीय जांच हो।

हाईवे पर लगा जाम, पुलिस प्रशासन मौके पर

सुबह 8 बजे से मैनपुर में चक्काजाम शुरू होने के कारण नेशनल हाईवे के दोनों ओर ट्रकों और बसों की कई किलोमीटर लंबी लाइन लग गई है। मौके पर तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक कलेक्टर खुद आकर मांग पूरी नहीं करते और अधीक्षक पर कार्रवाई नहीं होती, जाम नहीं हटेगा।


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Duniya Dastak का मानवीय पहलू: इकलौती संतान खोने का गम

राघव अपने माता-पिता का अकेला सहारा था। उसके नाना ने उसे बेहतर शिक्षा के लिए भाठीगढ़ के आश्रम में भर्ती कराया था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि शिक्षा का मंदिर लापरवाही का केंद्र बन जाएगा। यह घटना बस्तर और गरियाबंद के सुदूर क्षेत्रों में संचालित आश्रमों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा है। यदि समय रहते बच्चे को इलाज मिल जाता या उसके माता-पिता को सूचित कर दिया जाता, तो शायद आज राघव जीवित होता।

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