सिस्टम की क्रूरता: 4 बैंक खाते, 20 बार दफ्तर की दौड़, फिर भी नहीं मिली PM आवास की किश्त; थक-हारकर गरियाबंद की बुजुर्ग महिला ने PMO को लिखी चिट्ठी

गरियाबंद की हराबाई नायक, पीएम आवास योजना की किश्त न मिलने की व्यथा। (duniyadastak.com)
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गरियाबंद/मैनपुर (दुनिया दस्तक): गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक से सिस्टम को शर्मसार करने वाली एक तस्वीर सामने आई है। यहाँ की ग्राम पंचायत उसरीपानी में रहने वाली 68 वर्षीय बुजुर्ग महिला हराबाई नायक पिछले एक साल से अपने हक के पक्के मकान के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। हद तो तब हो गई जब अधिकारियों ने तकनीकी दिक्कतों का हवाला देकर उन्हें दफ्तरों के चक्कर कटवाए, लेकिन समाधान नहीं किया। थक-हारकर अब इस बुजुर्ग महिला ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है।

टूटे मकान पर तिरपाल, बुढ़ापे में भारी बेबसी

हराबाई नायक की स्थिति आज अत्यंत दयनीय है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत सूची में नाम आने के बाद उन्होंने बड़े उत्साह के साथ अपने कच्चे मकान का आधा हिस्सा ढहा दिया था, ताकि पक्का निर्माण शुरू हो सके। लेकिन प्रशासन ने पहली किश्त ही जारी नहीं की। आज वह अपने वृद्ध पति और बेटे के साथ उसी टूटे हुए घर पर प्लास्टिक का तिरपाल डालकर रहने को मजबूर हैं। कड़ाके की ठंड और बरसात के साये में यह परिवार पिछले एक साल से सरकारी मदद की बाट जोह रहा है।

डिजिटल बाधा: 4 बैंक खाते और 20 बार जनपद की दौड़

प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि हराबाई ने पिछले एक साल में जनपद कार्यालय मैनपुर के 20 से अधिक चक्कर लगाए। अधिकारियों ने उन्हें कभी आधार सीडिंग तो कभी ई-केवाईसी (e-KYC) में त्रुटि का बहाना बनाकर वापस भेज दिया। अधिकारियों के ही सुझाव पर उन्होंने चार अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए, ताकि किसी भी तरह पैसा आ सके, लेकिन डिजिटल इंडिया की यह ‘तकनीकी खामी’ गरियाबंद के अफसरों से साल भर तक दूर नहीं हो सकी।

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अधिवक्ता की मदद से PMO तक पहुँची आवाज

जब स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तो हराबाई ने स्थानीय अधिवक्ता कन्हैया मांझी की मदद ली। 27 जनवरी को उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को अपनी पूरी आपबीती लिखकर भेजी। पत्र में उन्होंने बताया कि कैसे एक गरीब परिवार पक्के घर की उम्मीद में बेघर हो गया है। जैसे ही यह मामला मीडिया की सुर्खियों में आया और PMO तक पहुँचा, गरियाबंद प्रशासन में हड़कंप मच गया।

अधिकारियों का अब दावा: “दो-तीन दिन में आएगी किश्त”

मामले के उजागर होने के बाद आवास योजना के ब्लॉक समन्वयक शिव कुमार नवरंगे ने सफाई देते हुए कहा कि ई-केवाईसी की तकनीकी त्रुटियों को दूर करने के लिए ब्लॉक से जिला स्तर तक प्रयास किए जा रहे थे। अब फिंगर वेरिफिकेशन के बाद पोर्टल पर ‘टिकट नंबर’ जनरेट कर स्टेट कोऑर्डिनेटर को भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि हराबाई का नाम अब ‘ग्रीन लिस्ट’ में आ गया है और अगले दो से तीन दिनों के भीतर पहली किश्त उनके खाते में जमा कर दी जाएगी।

गरियाबंद जिले की विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक अपडेट के लिए [जिला प्रशासन गरियाबंद] की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ।

Duniya Dastak का सवाल: क्या पत्र लिखना ही एकमात्र रास्ता है?

यह मामला साफ तौर पर गरियाबंद जिले के पंचायत विभाग और जनपद अधिकारियों की उदासीनता को दर्शाता है। क्या एक गरीब ग्रामीण को अपना हक पाने के लिए हमेशा PMO का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा? हराबाई के छोटे बेटे की शादी भी इसी घर के कारण रुकी हुई है। सवाल यह है कि इस एक साल की मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का जिम्मेदार कौन है?

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