बस्तर पांडुम महोत्सव: भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर अमित शाह ने की पीएम मोदी की तारीफ

अमित शाह और पीएम मोदी बस्तर पांडुम महोत्सव चर्चा छत्तीसगढ़
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जगदलपुर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में आयोजित ‘बस्तर पांडुम महोत्सव’ के समापन समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार आदिवासी समाज के सशक्तिकरण और उनकी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए निरंतर काम कर रही है।

आदिवासी उत्पादों की ब्रांडिंग से बढ़ा रोजगार
बस्तर पांडुम महोत्सव में अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल आदिवासी संस्कृति, खान-पान और विरासत को बढ़ावा दिया, बल्कि वन संसाधनों को ब्रांडिंग और मार्केटिंग के जरिए व्यापारिक रूप से भी मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाना, देश के विकास में आदिवासी समुदाय के योगदान को सम्मान देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

बस्तर पांडुम महोत्सव में दिखा बस्तर का गौरव
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित इस बस्तर पांडुम महोत्सव में बस्तर की समृद्ध परंपराओं की झलक देखने को मिली। गृह मंत्री ने कहा कि इन प्रयासों से आदिवासी परंपराएं मुख्यधारा में आई हैं और स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा हुए हैं।

राष्ट्रपति मुर्मू ने किया था बस्तर पांडुम महोत्सव उद्घाटन
बता दें कि बस्तर पांडुम के इस भव्य आयोजन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया था। बस्तर पांडुम उत्सव के दौरान बस्तर के पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक नृत्य, स्वदेशी वेशभूषा और स्थानीय वन उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसने बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित किया।

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लुप्त हो रहे खान-पान और कला को मिला नया मंच
महोत्सव में हिस्सा लेने वाले कलाकारों और विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम की तारीफ की।

निर्णायक मंडल के सदस्य सोमरु राम कवासी ने बताया कि – यहां ‘कल’ और ‘मेल’ जैसे पारंपरिक पेय पदार्थों और बिना तेल के बनने वाले शुद्ध देसी व्यंजनों को प्रदर्शित किया गया है।

प्रतिभागी निशा नाग ने कहा कि – प्रशासन की मदद से 40 प्रकार के पेय और 10 तरह के पारंपरिक दलिया (पेज) को लोगों के सामने लाने का मौका मिला, जो अब लुप्त होने की कगार पर थे।

लोक कलाकार शानू मारकंडे और संगीता मरकाम ने कहा कि – राष्ट्रपति के सामने अपनी कला का प्रदर्शन करना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने मांग की कि ऐसी परंपराओं को बचाने के लिए सरकार को एक समर्पित विभाग बनाना चाहिए।

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