रायपुर (दुनिया दस्तक):
छत्तीसगढ़ के गाँवों से लेकर शहरों की गलियों तक इन दिनों राशन दुकानों के बाहर लंबी कतारें दिख रही हैं। यह कतारें केवल चावल लेने के लिए नहीं, बल्कि अपने ‘अस्तित्व’ की लड़ाई के लिए हैं। प्रदेश के करीब 77 लाख राशन कार्ड धारकों के लिए इस वक्त सबसे बड़ी चिंता का विषय है— ई-केवाईसी (e-KYC)। सोशल मीडिया पर फैलती अफवाहों और तकनीकी दिक्कतों के बीच, खाद्य विभाग ने अब एक सख्त लेकिन जरूरी आदेश जारी कर दिया है। यदि 31 मार्च 2026 तक आपके परिवार के हर सदस्य का अंगूठा मशीन पर नहीं लगा, तो अगले महीने से आपके घर का चूल्हा मुश्किल में पड़ सकता है।
एक बुजुर्ग की चिंता और ‘डिजिटल’ चुनौती
धमतरी जिले के एक छोटे से गाँव के रहने वाले 70 वर्षीय ‘बंशी काका’ अपनी लाठी के सहारे राशन दुकान पहुंचे हैं। उनके हाथ कांप रहे हैं और मेहनत की वजह से उंगलियों की रेखाएं मिट सी गई हैं। वे कहते हैं, “बेटा, तीन बार मशीन पर अंगूठा लगाया पर लाइट हरी नहीं हुई। कोटेदार कहता है कि जब तक मशीन ‘हाँ’ नहीं कहेगी, चावल नहीं मिलेगा। अब डर लग रहा है कि कहीं मेरा नाम सरकारी कागजों से मिट न जाए।”
बंशी काका की यह चिंता छत्तीसगढ़ के हजारों बुजुर्गों और मेहनतकश मजदूरों की है। दुनिया दस्तक ने जब इसकी पड़ताल की, तो पाया कि सरकार का उद्देश्य बंशी काका जैसे असली हकदारों का हक मारना नहीं, बल्कि उन ‘भूतिया’ नामों को हटाना है जो सालों से बिना अस्तित्व के राशन डकार रहे हैं।
ई-केवाईसी क्यों है अनिवार्य? अन्य न्यूज़ साइट्स का विश्लेषण
विभिन्न विश्वसनीय न्यूज़ पोर्टल्स और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में लाखों राशन कार्ड ऐसे पाए गए हैं जिनमें सदस्यों की मृत्यु हो चुकी है या वे शहर छोड़कर जा चुके हैं, फिर भी उनके नाम पर राशन उठाया जा रहा है।
- पारदर्शिता: ई-केवाईसी से यह सुनिश्चित होगा कि राशन उसी व्यक्ति को मिल रहा है जिसका नाम कार्ड में है।
- फर्जीवाड़ा रोकना: एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग कार्ड्स में नाम होने की समस्या खत्म होगी।
- बजट का सही उपयोग: सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी का लाभ केवल पात्र परिवारों तक पहुंचेगा।
31 मार्च की डेडलाइन: क्या वाकई राशन बंद हो जाएगा?
खाद्य विभाग के सचिव ने स्पष्ट किया है कि 31 मार्च 2026 तक की समय सीमा उन लोगों के लिए है जिन्होंने अब तक एक बार भी प्रयास नहीं किया है। विभाग का कहना है कि इसके बाद डेटा को ‘फिल्टर’ किया जाएगा। जिन सदस्यों का ई-केवाईसी पेंडिंग रहेगा, उनका नाम अस्थायी रूप से ‘सस्पेंड’ किया जा सकता है। इसका मतलब है कि कार्ड तो रहेगा, लेकिन उस सदस्य के हिस्से का चावल मिलना बंद हो जाएगा।
“दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 80% केवाईसी का काम पूरा हो चुका है।”
ई-केवाईसी की प्रक्रिया: घर बैठे क्या कर सकते हैं?
कई लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह मोबाइल से हो सकता है? जवाब है— नहीं। चूंकि इसमें बायोमेट्रिक (अंगूठे या आंखों की पुतली) का मिलान आधार डेटा से किया जाता है, इसलिए आपको राशन दुकान (PDS) जाना ही होगा।
प्रक्रिया बहुत सरल है:
- आधार कार्ड: परिवार के उन सभी सदस्यों को साथ ले जाएं जिनका केवाईसी होना है।
- दुकान चयन: आप प्रदेश की किसी भी सरकारी राशन दुकान पर जाकर ई-केवाईसी करा सकते हैं, ज़रूरी नहीं कि जहाँ से राशन लेते हैं वहीं जाएं।
- निशुल्क सेवा: याद रखें, सरकार इसके लिए एक रुपया भी नहीं लेती। यदि कोई दुकानदार ‘सर्वर चार्ज’ के नाम पर पैसे मांगे, तो वह अवैध है।
यह छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग की मुख्य साइट में जाने के लिए यहां क्लिक करें
तकनीकी दिक्कतें और समाधान
खबरों के मुताबिक, कई जगहों पर सर्वर डाउन होने की वजह से लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। खासकर ग्रामीण अंचलों में नेटवर्क की समस्या बड़ी बाधा है। इसके लिए विभाग ने ‘ऑफलाइन मोड’ और ‘आईरिस स्कैन’ (आंखों से पहचान) की सुविधा भी कुछ केंद्रों पर शुरू की है। यदि किसी बुजुर्ग के अंगूठे के निशान मैच नहीं हो रहे हैं, तो उनके आधार को अपडेट करवाकर या आंखों के स्कैन से प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
राशन कार्ड धारकों के लिए एक नज़र में मुख्य जानकारी:
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
| अंतिम तिथि | 31 मार्च 2026 |
| अनिवार्य दस्तावेज | आधार कार्ड और राशन कार्ड |
| कहाँ करवाएं? | किसी भी शासकीय उचित मूल्य दुकान पर |
| शुल्क | पूरी तरह से निशुल्क (FREE) |
| किसे करवाना है? | परिवार के प्रत्येक सदस्य को |
दुनिया दस्तक की ग्राउंड रिपोर्ट और सुझाव
हमारी टीम ने जब रायपुर के कुछ केंद्रों का दौरा किया, तो पाया कि सुबह 10 से 1 बजे तक सबसे ज्यादा भीड़ रहती है। हमारी सलाह: * दोपहर 3 बजे के बाद केंद्र पर जाएं, उस समय सर्वर भी बेहतर चलता है और भीड़ भी कम होती है।
- बच्चों और बुजुर्गों को साथ ले जाने से पहले कोटेदार से पूछ लें कि मशीन और सर्वर सही काम कर रहे हैं या नहीं।
आपके हक की बात
सरकार की मंशा ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ योजना को पूरी तरह से लागू करने की है। यह प्रक्रिया थोड़ी कष्टदायक हो सकती है, लेकिन भविष्य में आप देश के किसी भी कोने में अपना राशन ले सकेंगे। duniyadastak.com आपसे अपील करता है कि अंतिम तारीख का इंतज़ार न करें। आज ही अपनी राशन दुकान जाकर इस प्रक्रिया को पूरा करें और अपने परिवार के ‘निवाले’ को सुरक्षित करें।



