रायपुर (दुनिया दस्तक): छत्तीसगढ़ की शांत आबोहवा में सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। निर्वाचन आयोग ने राज्य की दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव की तारीख (16 मार्च 2026) का ऐलान कर दिया है। यह खबर राजधानी के गलियारों से लेकर बस्तर के जंगलों और सरगुजा के पहाड़ों तक चर्चा का विषय बन गई है। लेकिन यह चुनाव सिर्फ नेताओं की हार-जीत का नहीं है, यह चुनाव है छत्तीसगढ़ के मान-सम्मान और हक़ की आवाज़ का।
कुर्सी की दौड़ और आम आदमी की कसक
छत्तीसगढ़ की दो सीटें खाली हो रही हैं। वर्तमान सांसद के.टी.एस. तुलसी और फूलोदेवी नेताम का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो जाएगा। पिछले 6 सालों में इन्होंने संसद में अपनी भूमिका निभाई, लेकिन छत्तीसगढ़ की आम जनता के मन में हमेशा एक कसक रही है। लोग अक्सर चाय की दुकानों पर चर्चा करते मिल जाते हैं— “का हमर छत्तीसगढ़ में अइसन कोनो नेता नई हे, जेला दिल्ली भेजे जा सके? आखिर कब तक बाहरी मन हमर किस्मत के फैसला करहीं?”
इस बार का चुनाव इसी ‘कसक’ को दूर करने का मौका है। राज्य में सत्ता बदल चुकी है, और अब डबल इंजन की सरकार है। ऐसे में उम्मीदें भी दोगुनी हैं।
चुनावी गणित: इस बार ‘कमल’ का पलड़ा भारी
विधानसभा के आंकड़ों की बात करें तो गणित बहुत सीधा है। भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, जिसके कारण यह लगभग तय माना जा रहा है कि दोनों की दोनों सीटें इस बार भाजपा की झोली में गिरेंगी। कांग्रेस के लिए अपनी सीट बचाना इस बार ‘लोहे के चने चबाने’ जैसा होने वाला है।
- भाजपा का मौका: भाजपा के पास सुनहरा अवसर है कि वह किसी ज़मीनी कार्यकर्ता या ‘धरती पुत्र’ को राज्यसभा भेजकर यह साबित करे कि वह वाकई छत्तीसगढ़िया संस्कृति की रक्षक है।
- कांग्रेस की मुश्किल: कांग्रेस के लिए यह आत्ममंथन का समय है कि आखिर क्यों उनके हाथ से एक-एक करके सत्ता की कड़ियाँ छिटकती जा रही हैं।
‘धरती पुत्र’ की मांग: पैराशूट लैंडिंग पर रोक की उम्मीद
छत्तीसगढ़ का किसान, जो धान के कटोरे की चिंता करता है; बस्तर का आदिवासी, जो अपनी संस्कृति को बचाने की जंग लड़ रहा है; और रायपुर का युवा, जो रोज़गार की राह देख रहा है— इन सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि राज्यसभा जाने वाले चेहरे कौन होंगे?
अक्सर देखा गया है कि राज्यसभा को ‘रिटायरमेंट’ या ‘दिल्ली के बड़े चेहरों’ को एडजस्ट करने का ठिकाना बना दिया जाता है। लेकिन ‘दुनिया दस्तक’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ की जनता यह सवाल पूछ रही है कि क्या इस बार दिल्ली की दहलीज पर वह आवाज़ गूँजेगी जो हसदेव के जंगलों का दर्द जानती हो? क्या वह चेहरा होगा जिसे महानदी की लहरों और अरपा-पैरी की धार का अहसास हो?
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चुनाव का पूरा कैलेंडर: नोट कर लें ये तारीखें
निर्वाचन आयोग ने पूरी तैयारी कर ली है। चुनाव की प्रक्रिया पारदर्शी और लोकतांत्रिक तरीके से होगी:
- नामांकन प्रक्रिया: मार्च के पहले सप्ताह में शुरू होगी।
- वोटिंग का दिन: 16 मार्च 2026।
- नतीजे: उसी दिन शाम 5 बजे के बाद साफ़ हो जाएगा कि छत्तीसगढ़ का नया प्रतिनिधि कौन होगा।
क्या बदलेगी छत्तीसगढ़ की किस्मत?
जब केंद्र और राज्य में एक ही विचारधारा की सरकार हो, तो राज्यसभा की भूमिका और बढ़ जाती है। राज्य की कई लंबित योजनाएं, रेल परियोजनाओं की मंजूरी और सिंचाई योजनाओं के लिए दिल्ली से फंड लाना तभी आसान होगा जब वहाँ बैठा सांसद छत्तीसगढ़ की नब्ज पहचानता हो। यह चुनाव सिर्फ दो लोगों को कुर्सी पर बिठाने का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्रगति की रफ़्तार तय करने का चुनाव है।
जनता की उम्मीदें और राजनीति की बिसात
सियासत की बिसात बिछ चुकी है। मोहरे सजाए जा रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही मंथन में जुटे हैं। लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या 16 मार्च को छत्तीसगढ़ की मिट्टी से जुड़ा कोई ‘लाल’ दिल्ली के संसद भवन में प्रवेश करेगा?



