छत्तीसगढ़ में परीक्षा के तनाव ने ली 4 छात्रों की जान: बोर्ड एग्जाम से पहले मातम, आखिर क्यों टूट रहा है बच्चों का हौसला?

परीक्षा के तनाव में सिर पकड़कर बैठा एक छात्र और सामने खुली किताबों पर फेल का निशान
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रायपुर (दुनिया दस्तक): छत्तीसगढ़ में इस समय बोर्ड परीक्षाओं का दौर शुरू होने वाला है, लेकिन दुर्भाग्यवश इसे ‘परीक्षा का मौसम’ कहने के बजाय ‘त्रासदी का मौसम’ कहा जा रहा है। पिछले महज 48 घंटों के भीतर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से चार होनहार छात्रों की आत्महत्या की खबर ने शिक्षा विभाग, अभिभावकों और समाज को झकझोर कर रख दिया है। ये चारों छात्र बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे, लेकिन परीक्षा के डर और अच्छे परिणाम के दबाव ने उन्हें मौत के करीब धकेल दिया।

48 घंटे, 4 मौतें: प्रदेश में मचा हड़कंप

छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे प्रमुख केंद्रों से ये मामले सामने आए हैं। शुरुआती जांच में पुलिस ने पाया कि इन सभी छात्रों के मन में परीक्षाओं को लेकर गहरा डर बैठा हुआ था।

  • पहला मामला (रायपुर): राजधानी के एक निजी स्कूल में पढ़ने वाले 12वीं के छात्र ने अपने कमरे में फांसी लगा ली। परिजनों के अनुसार, वह पिछले कई दिनों से पढ़ाई को लेकर तनाव में था और देर रात तक जागकर पढ़ाई करता था।
  • दूसरा मामला (दुर्ग): 10वीं की एक छात्रा ने जहर खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। उसने अपने पीछे छोड़े छोटे से नोट में लिखा कि उसे डर है कि वह गणित के पेपर में पास नहीं हो पाएगी।
  • तीसरा और चौथा मामला (बिलासपुर): यहाँ दो अलग-अलग घटनाओं में छात्रों ने पढ़ाई के दबाव के चलते आत्मघाती कदम उठाया। इनमें से एक छात्र कोचिंग से लौटने के बाद काफी परेशान देखा गया था।

क्या है इस त्रासदी की वजह?

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बोर्ड परीक्षाओं को ‘जीवन और मरण’ का सवाल बना देना ही सबसे बड़ी गलती है। 2026 के इस डिजिटल युग में भी छात्रों पर ‘90% से ज्यादा अंक’ लाने का जो सामाजिक और पारिवारिक दबाव है, वह उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है।

अभिभावकों की तुलनात्मक प्रवृत्ति (Comparison) बच्चों के आत्मविश्वास को कम कर देती है। जब बच्चा सुनता है कि “फलाने के बेटे के इतने नंबर आए, तुम्हारे क्यों नहीं?” तो वह खुद को असफल मानने लगता है। यही असफलता का डर उसे ऐसे खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर कर देता है।

सरकार और प्रशासन की चिंता

इन घटनाओं के बाद छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) और स्कूल शिक्षा विभाग अलर्ट मोड पर है। विभाग ने स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे छात्रों के लिए विशेष ‘काउंसलिंग सेशन’ आयोजित करें। मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने भी अपील की है कि “परीक्षा जीवन का एक हिस्सा है, पूरा जीवन नहीं।”

अभिभावकों के लिए ज़रूरी सलाह

विशेषज्ञों के अनुसार, परीक्षा के दौरान बच्चों में ये लक्षण दिखें तो तुरंत सावधान हो जाएं:

  1. अचानक शांत हो जाना या गुमसुम रहना।
  2. नींद न आना या बहुत कम खाना खाना।
  3. हर समय पढ़ाई की बात करना या फेल होने का डर जताना।
  4. चिड़चिड़ापन या बार-बार रोना।

यदि आपके बच्चे में ऐसे लक्षण दिख रहे हैं, तो उससे बात करें। उसे भरोसा दिलाएं कि उसके अंक चाहे जो भी हों, आपका प्यार उसके लिए कम नहीं होगा।

ज़रूरी जानकारी: परीक्षाओं के दौरान तनाव महसूस होने पर छात्र या अभिभावक आसरा हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं। साथ ही, बोर्ड परीक्षाओं के आधिकारिक अपडेट के लिए CGBSE की वेबसाइट देखते रहें।

दुनिया दस्तक की अपील

छात्रों, याद रखें कि एक मार्कशीट का टुकड़ा आपका भविष्य तय नहीं कर सकता। सचिन तेंदुलकर से लेकर बिल गेट्स तक, दुनिया के सबसे सफल लोगों ने परीक्षाओं से कहीं ज्यादा जीवन के संघर्षों से सीखा है। यदि आप तनाव महसूस कर रहे हैं, तो तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षक या हेल्प लाइन नंबर पर बात करें।

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