गरियाबंद में दवा दुकानों पर विभाग की बड़ी दबिश: पाण्डुका के 01 मेडिकल स्टोर में मिलीं अनियमितताएं, लाइसेंस रद्द करने की तैयारी

पाण्डुका के मेडिकल स्टोर में औषधि निरीक्षक धर्मवीर सिंह ध्रुव द्वारा दवाओं के नमूने जब्त करने की कार्रवाई
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गरियाबंद (दुनिया दस्तक): आम आदमी के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले दवा विक्रेताओं के खिलाफ गरियाबंद औषधि प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। जिले के पाण्डुका क्षेत्र में संचालित ‘के.वी. लक्ष्मी मेडिकल स्टोर्स’ में औषधि विभाग की टीम ने औचक निरीक्षण कर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस दौरान न केवल संदिग्ध दवाओं के नमूने जब्त किए गए, बल्कि दुकान में भारी अनियमितताएं पाए जाने पर लाइसेंस निरस्त करने की अनुशंसा भी की गई है।

गुप्त सूचना पर हुई औचक कार्रवाई

औषधि विभाग को पिछले कुछ समय से पाण्डुका क्षेत्र की दवा दुकानों में नियमों के उल्लंघन और संदिग्ध दवाओं की बिक्री की शिकायतें मिल रही थीं। इन सूचनाओं की गंभीरता को देखते हुए, औषधि निरीक्षक धर्मवीर सिंह ध्रुव के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। मंगलवार को टीम ने अचानक पाण्डुका स्थित के.वी. लक्ष्मी मेडिकल स्टोर्स पर धावा बोला। अचानक हुई इस कार्रवाई से पूरे क्षेत्र के दवा व्यापारियों में हड़कंप मच गया।

संदिग्ध दवाओं के नमूने रायपुर भेजे गए

निरीक्षण के दौरान टीम ने दुकान में रखे स्टॉक की बारीकी से जांच की। जांच के दौरान दो विशेष दवाओं की गुणवत्ता और उनके निर्माण रिकॉर्ड पर टीम को गहरा संदेह हुआ। औषधि निरीक्षक ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इन दोनों दवाओं के नमूने (Samples) सील किए।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इन नमूनों को औषधि जांच प्रयोगशाला (Drug Testing Laboratory), रायपुर भेज दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि दवाएं मानक स्तर (Standard Quality) की हैं या नहीं। यदि रिपोर्ट में दवाएं नकली या घटिया पाई जाती हैं, तो संबंधित संचालक के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा।

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इंसानी जान से खिलवाड़: एक्सपायरी दवाओं का जखीरा

निरीक्षण के दौरान जो सबसे गंभीर बात सामने आई, वह थी दुकान में एक्सपायरी (अवधि पार) दवाओं की मौजूदगी। औषधि प्रशासन के नियमों के अनुसार, एक्सपायरी दवाओं को स्टॉक से अलग रखा जाना चाहिए और उन्हें नष्ट करने की एक तय प्रक्रिया होती है। लेकिन, इस मेडिकल स्टोर में ये दवाएं सामान्य स्टॉक के पास ही पाई गईं, जिससे उनके बिकने की संभावना बनी रहती है।

इसके अलावा, दवाओं के भंडारण (Storage) में भी बड़ी लापरवाही देखी गई। कई दवाएं जिन्हें कम तापमान या फ्रिज में रखा जाना अनिवार्य है, वे खुले में रखी मिलीं। ऐसी स्थिति में दवाओं की रासायनिक संरचना बदल सकती है और वे फायदे के बजाय नुकसान पहुँचा सकती हैं।

छत्तीसगढ़ औषधि प्रशासन के नियमों और सुरक्षा मानकों की अधिक जानकारी के लिए [CG FDA] की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई: लाइसेंस पर लटकी तलवार

औषधि निरीक्षक धर्मवीर सिंह ध्रुव ने निरीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि दुकान संचालक द्वारा नियमों का गंभीर उल्लंघन किया गया है। इन अनियमितताओं के आधार पर विभाग ने ड्रग लाइसेंस निलंबित या रद्द (Cancellation) करने की अनुशंसा की है।


Duniya Dastak का मानवीय दृष्टिकोण

दवाएं जीवन रक्षक होती हैं, लेकिन जब मुनाफे की हवस में मेडिकल स्टोर संचालक एक्सपायरी या असुरक्षित दवाएं बेचने लगते हैं, तो वे जीवन रक्षक के बजाय ‘यमराज’ बन जाते हैं। पाण्डुका की यह कार्रवाई उन हजारों मरीजों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो अपनी मेहनत की कमाई दवाओं पर खर्च करते हैं और बदले में शुद्धता की उम्मीद रखते हैं।

औषधि विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि दवा खरीदते समय हमेशा पक्का बिल लें और एक्सपायरी डेट की जांच स्वयं भी करें।

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