राजिम/गरियाबंद: छत्तीसगढ़ की धर्मनगरी और छत्तीसगढ़ के प्रयाग के रूप में विख्यात राजिम में इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व अभूतपूर्व होने जा रहा है। महानदी, पैरी और सोढुर नदियों के पवित्र त्रिवेणी संगम के बीचों-बीच स्थित भगवान कुलेश्वर महादेव का मंदिर भक्तों की आस्था का वह केंद्र है, जहाँ हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपने आराध्य को जल अर्पण करने पहुँचते हैं। इस बार 15 फरवरी 2026 को पड़ने वाली महाशिवरात्रि को लेकर राजिम प्रशासन और स्थानीय निवासियों ने तैयारियां अभी से युद्धस्तर पर शुरू कर दी हैं।
आस्था का संगम: क्यों खास है कुलेश्वर महादेव का दर्शन?
कुलेश्वर महादेव मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की प्राचीन वास्तुकला और संस्कृति का अद्भुत प्रतीक भी है। जनश्रुति है कि माता सीता ने अपने वनवास काल के दौरान यहाँ रेत का शिवलिंग बनाकर महादेव की पूजा की थी। इसी कारण यहाँ की रेत और पत्थरों में भक्तों को शिव का वास महसूस होता है।
राजिम के स्थानीय निवासी बताते हैं कि “महाशिवरात्रि के दिन संगम में स्नान करने के बाद जब हम कुलेश्वर महादेव के चरणों में शीश नवाते हैं, तो वह शांति मिलती है जो कहीं और संभव नहीं है।” इस बार रविवार को शिवरात्रि पड़ने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है।
कुलेश्वर महादेव मंदिर राजिम का इतिहास
कुलेश्वर महादेव मंदिर सिर्फ एक देवालय नहीं, बल्कि हज़ारों वर्षों के इतिहास का साक्षी है। यह मंदिर 9वीं शताब्दी का माना जाता है, जो अपनी विशेष स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है।
पौराणिक कथा और मान्यताएं
कहा जाता है कि वनवास काल के दौरान माता सीता ने यहाँ स्वयं अपने हाथों से रेत का शिवलिंग बनाया था और भगवान शिव की आराधना की थी। मंदिर की बनावट ऐसी है कि भयंकर बाढ़ आने पर भी यह अडिग खड़ा रहता है। मंदिर के ऊंचे चबूतरे और पत्थरों पर उकेरी गई आकृतियाँ श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि जो भक्त सच्चे मन से यहाँ शिवरात्रि पर मन्नत मांगता है, महादेव उसकी झोली कभी खाली नहीं रहने देते।
महाशिवरात्रि 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि अत्यंत शुभ संयोग लेकर आ रही है।
- निशिता काल पूजा का समय: 15 फरवरी की मध्यरात्रि (यानी 16 फरवरी की शुरुआत) 12:09 बजे से 01:01 बजे तक रहेगा। यह वही समय है जब शिव और शक्ति का मिलन हुआ था।
- चतुर्दशी तिथि का आरंभ: 15 फरवरी, शाम 05:04 बजे से।
- चतुर्दशी तिथि का समापन: 16 फरवरी, शाम 05:34 बजे तक।
- पारण का समय: जो भक्त व्रत रखते हैं, वे 16 फरवरी को सूर्योदय के बाद पारण कर सकते हैं।
रायपुर से राजिम: यात्रा मार्ग और ट्रेन का समय
राजधानी रायपुर से राजिम की दूरी लगभग 45 किलोमीटर है। महाशिवरात्रि के दौरान सड़क मार्ग पर भारी दबाव रहता है, इसलिए रेलवे प्रशासन विशेष प्रबंध कर रहा है।
रेलवे का संभावित समय सारणी: भक्तों की सुविधा के लिए रायपुर से राजिम (नवापारा राजिम स्टेशन) के लिए निम्नलिखित ट्रेनें उपलब्ध रहेंगी:
- सुबह की स्पेशल पैसेंजर: रायपुर से सुबह 07:15 बजे प्रस्थान, राजिम आगमन सुबह 08:45 बजे।
- दोपहर की एक्सप्रेस: रायपुर से दोपहर 01:30 बजे प्रस्थान, राजिम आगमन दोपहर 02:50 बजे।
- शाम की वापसी ट्रेन: राजिम से रायपुर के लिए शाम 07:30 बजे प्रस्थान।
ट्रेन की वर्तमान स्थिति और समय की अधिक जानकारी के लिए [https://enquiry.indianrail.gov.in/] पर जाएँ।
नोट: यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे रेलवे के आधिकारिक ऐप या स्टेशन काउंटर से अंतिम समय की पुष्टि अवश्य कर लें।
‘Where is my Train’ ऐप या रेलवे के ‘NTES’ पोर्टल के माध्यम से भी रायपुर-राजिम स्पेशल ट्रेनों की ताज़ा जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
राजिम माघी पुन्नी मेला: अध्यात्म और उत्सव का मिलन
महाशिवरात्रि का पर्व राजिम मेले का मुख्य आकर्षण होता है। 15 दिनों तक चलने वाले इस मेले में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, व्यंजन और हस्तशिल्प का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। कुलेश्वर महादेव मंदिर के पास बने डोम और घाटों पर साधु-संतों का जमावड़ा लगा रहता है, जहाँ शाम की आरती का दृश्य देख ऐसा प्रतीत होता है जैसे साक्षात् काशी उतर आई हो।
यह भी पढ़ें: रायपुर में सरकारी नौकरी का शानदार अवसर: WCD विभाग में भर्ती, जल्द करें आवेदन, ₹14,564 तक वेतन—जल्द करें आवेदन
भक्तों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश
भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कुछ सुझाव जारी किए हैं:
- नदी में सावधानी: संगम के गहरे पानी में न जाएं, केवल चिन्हित घाटों पर ही स्नान करें।
- प्लास्टिक मुक्त राजिम: अपनी पवित्र नगरी को साफ रखने के लिए प्लास्टिक का उपयोग न करें।
- स्वास्थ्य केंद्र: मेला क्षेत्र में जगह-जगह प्राथमिक उपचार केंद्र बनाए गए हैं।
दुनिया दस्तक’ की अपील
महाशिवरात्रि केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि स्वयं को ईश्वर से जोड़ने का एक अवसर है। राजिम की पावन धरा पर कुलेश्वर महादेव आप सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करें। “दुनिया दस्तक” आपसे अपील करता है कि भक्ति के साथ-साथ अनुशासन का भी पालन करें ताकि सभी श्रद्धालु सुरक्षित दर्शन कर सकें।



