रायपुर (दुनिया दस्तक): छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा को माओवादियों के एक बड़े गुट ने चार पन्नों का पत्र लिखकर आत्मसमर्पण (Surrender) करने की इच्छा जताई है। यह पहली बार है जब नक्सलियों के एक सक्रिय संगठन ने सीधे सरकार को पत्र लिखकर सार्वजनिक रूप से सुरक्षा और पुनर्वास का भरोसा मांगा है।
15 हथियारबंद कैडरों ने उठाई आवाज
भाकपा (माओवादी) के बलांगीर-बरगढ़-महासमुंद डिवीजन (BBM) की ओर से भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि उनके संगठन के 15 सशस्त्र नक्सली अब हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं। पत्र पर ‘विकास’ नामक व्यक्ति के हस्ताक्षर हैं, जिसने खुद को पश्चिमी उप-क्षेत्रीय ब्यूरो का सचिव बताया है।
इस गुट में शामिल 15 सदस्यों में से 14 छत्तीसगढ़ के मूल निवासी हैं, जबकि एक सदस्य तेलंगाना से ताल्लुक रखता है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ये सभी कैडर वर्तमान में ओडिशा सीमा के पास सक्रिय हैं, लेकिन आत्मसमर्पण के लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ को चुना है क्योंकि अधिकांश सदस्य बस्तर क्षेत्र के रहने वाले हैं।
रेडियो पर मांगी सुरक्षा की गारंटी
नक्सलियों की मांगें काफी अनोखी और गंभीर हैं। पत्र में उन्होंने सरकार से मांग की है कि:
- रेडियो के माध्यम से घोषणा: नक्सलियों ने कहा है कि वे तभी बाहर आएंगे जब सरकार रेडियो (आकाशवाणी) के माध्यम से सार्वजनिक रूप से उनकी सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा का आश्वासन देगी।
- सर्च ऑपरेशन पर रोक: उन्होंने महासमुंद और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे ‘कॉम्बिंग ऑपरेशंस’ को तुरंत रोकने की मांग की है, ताकि वे सुरक्षित तरीके से निर्धारित स्थान पर पहुंच सकें।
- सुरक्षित कॉरिडोर: पत्र में 2 से 3 मार्च की तारीख का संकेत दिया गया है, जिस दौरान वे मुख्यधारा में लौट सकते हैं।
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गृहमंत्री विजय शर्मा का जवाब: “हम तैयार हैं”
नक्सलियों के इस पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा, “हमें नक्सलियों के एक डिवीजन का पत्र मिला है जिसमें उन्होंने मुख्यधारा से जुड़ने की इच्छा जताई है। आज हम रेडियो और अन्य माध्यमों से उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधाओं का पूरा भरोसा दे रहे हैं।”
गृहमंत्री ने आगे कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल शारीरिक आत्मसमर्पण कराना नहीं है, बल्कि उन युवाओं का मानसिक पुनर्वास करना भी है जो लंबे समय से भटक गए थे। उन्होंने दोहराया कि केंद्र और राज्य सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह से नक्सल मुक्त बनाना है।
राजनीतिक दल के रूप में मान्यता की मांग
पत्र में एक दूरगामी सुझाव भी दिया गया है। नक्सलियों ने लिखा है कि यदि माओवादी पार्टी सशस्त्र संघर्ष छोड़कर संविधान में विश्वास जताती है, तो उसे एक राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। साथ ही, जेलों में बंद माओवादियों की रिहाई और उन पर लगे केस वापस लेने की भी अपील की गई है। उनका मानना है कि अगर सरकार इन बिंदुओं पर विचार करती है, तो जेल में बंद अन्य नक्सली भी हिंसा का रास्ता त्याग देंगे।
सुरक्षा बलों की बड़ी उपलब्धि
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब बस्तर के दुर्गम इलाकों में सुरक्षा बल लगातार दबाव बना रहे हैं। हाल ही में कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में चलाए गए एक विशेष अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने 89 आईईडी (IED) विस्फोटक बरामद कर उन्हें नष्ट कर दिया था। जानकारों का मानना है कि सुरक्षा बलों की बढ़ती पैठ और सरकार की ‘पुनर्वास नीति’ के कारण अब नक्सलियों के शीर्ष कैडर भी टूटने लगे हैं।
दुनिया दस्तक का विश्लेषण: क्या यह अंत की शुरुआत है?
छत्तीसगढ़ में दशकों से चल रहे नक्सल संघर्ष में यह पत्र एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। यदि यह 15 कैडर सफलतापूर्वक आत्मसमर्पण करते हैं, तो यह अन्य गुटों के लिए भी एक रास्ता खोलेगा। हालांकि, खुफिया एजेंसियां पत्र की प्रमाणिकता और ‘विकास’ की पहचान की जांच कर रही हैं ताकि आत्मसमर्पण के नाम पर किसी भी प्रकार की साजिश से बचा जा सके।
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